डबल इंजन की सरकार के बेलगाम हावी अफसरशाही के खिलाफ ऊधम सिंह नगर से उठने लगी आवाज

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Reported by Tapas Vishwas

On 8 Jul 2020
डबल इंजन की सरकार के बेलगाम हावी अफसरशाही के खिलाफ ऊधम सिंह नगर से उठने लगी आवाज

 उत्तखण्ड राज्य गठन से ही प्रदेश में कई बार सरकारे बदली है , लेकिन बदलती सरकारो के साथ अफसरों का रवैया कभी नहीं बदला ,बल्कि लगातार हो रहे ताजा घटनाक्रमों को देखते हुए यह कहा जाए तो अतिशियोक्ति नहीं होगी कि प्रदेश में हमेशा अफसरशाही हावी रही है और सरकार की लगाम ढीली और बेलगाम ही रही है , जिससे यह बेखौफ और बेलगाम अधिकारियों ने हमेशा जनता का शोषण ही किया । जब जनप्रतिनिधियों तक को नौकरशाह कुछ नहीं समझ रहे तो आम, लाचार, मजबूर और बेबस जनता की क्या बिसात। वह भी उन हालातों में जब आजादी के इतने बरस बाद आज भी आम आदमी पुलिस थाने ऑर सरकारी दहलीज पर  चढऩे और अफसर के दफ्तर में झांकने तक में सिहर उठता है। वहां अफसरों का यह व्यवहार न्याय मांगने की उसकी हिम्मत को बढ़ाने की जगह रौंदने का ही काम कर रहा है। ऐसी घटनाएं उन तक अर्जी लेकर पहुंचने के आम आदमी के हौंसले को तोडऩे के लिए काफी हैं, आज हम यह बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि प्रदेश उत्तराखंड में सत्ता पक्ष के नेता भी यह मान रहे हैं कि बेलगाम अफसरशाही अफसरों के कारण प्रदेश की जनता को लगातार परेशानी और मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है विपक्ष के साथ आवाज बुलंद करते हुए उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री ऑर कई विधायक व सत्ता तल के कई छोटे-बड़े नेता लगातार प्रदेश में हावी अफसरशाही पर आवाज उठाते आए हैं। बात उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय की  करें तो जिस तरीके से घटनाएं सामने आ रही हैं यह बातें कुछ हद तक सही भी साबित होती नजर आ रही हैं ।  बीते कुछ दिन से  ऊधम सिंह नगर से सत्ता धारियो की आवाज अफसरशाही के खिलाफ बुलंद है । ताजा उदाहरण की बात करे तो किच्छा विधानसभा के विधायक राजेश शुक्ला का जिला अस्पताल में महिला की मौत पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठना।  शुक्ला के बाद विधायक राजकुमार ठुकराल का अधिकारियों को पथ भ्रष्ट कहना तमाम कई इस तरीके के उदाहरण हैं जिसके चलते मानो ऐसा लगता है कि ऊधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय पर अफसरशाही पूरी तरीके से हावी है । इतना ही नहीं बीते दिनों जिस तरीके से सत्ता दल के पार्षदों द्वारा गंगाजल की कसम खाकर महानगर रुद्रपुर के नगर निगम के नगर आयुक्त को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जानने के वाबजूद बिना किसी फैसले के उस प्रदर्शन को भी रोक दिया उससे तो ऐसा ही लगता है कि राजनेताओं के सामने मुख्यालय में अफसरशाही पूरी तरीके से हावी है। यही कारण है कि क्षेत्र और आम जनता विकास से लगातार पिछड़ता जा रहा है।  जिस तरीके से विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाने के बावजूद भी डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड में पूरी तरीके से फेल साबित हुई है । तो कहीं आगामी चुनाव में प्रदेश के उत्तराखंड सरकार को इसका खामियाजा ना उठाना पड़े ।











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