द अनटोल्ड स्टोरी : रुला देगा आपको कुमाऊं यूनिवर्सिटी की एम ए इंग्लिश हंसी प्रहरी का छात्रा उपाध्यक्ष से लेकर भीख मांगने तक का सफर

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Reported by Awaaz Desk

On 19 Oct 2020
द अनटोल्ड स्टोरी : रुला देगा आपको कुमाऊं यूनिवर्सिटी की एम ए इंग्लिश हंसी प्रहरी का छात्रा उपाध्यक्ष से लेकर भीख मांगने तक का सफर

जब तक आप किसी औहदे पर हैं तब तक दुनिया आपको सलाम करती है आपकी पहचान आपका रुतबा तय करता है,रुतबा गया समझिए आपकी पहचान भी गयी आप कब गुमनामी की गलियों में भटकते रह जाएंगे ये आप खुद भी नही जानतें, ये बात कड़वी ज़रूर है मगर सच है। ऐसा ही कुछ हंसी प्रहरी के साथ हुआ है जिसके नाम की धूम कभी कुमाऊं यूनिवर्सिटी में गूंजा करती थी,जिसके साथ सैकडों स्टूडेंट्स की भीड़ नारे लगाते हुए चलती थी जो कभी कुमाऊं यूनिवर्सिटी में छात्रा उपाध्यक्ष बन कर अपनी प्रतिभा के बल पर कॉलेज के छात्रों के हितों के लिए लड़ी थी वो हंसी प्रहरी आज अपनी ज़िंदगी की जंग सड़को पर भिक्षा मांग कर लड़ रही हैं।1999-2000 के दौर में हंसी प्रहरी कुमाऊं यूनिवर्सिटी की छात्रा उपाध्यक्ष रहीं, राजनीति और इंग्लिश जैसे विषयों से डबल एमए कर चुकी हैं, कॉलेज में कोई डिबेट हो और हंसी उस डिबेट का हिस्सा न बने ऐसा तो सम्भव ही नही था किसी भी मुद्दे पर जब हंसी बहस करती तब हर कोई कह उठता कि ये भविष्य में ज़रूर कुछ बड़ा काम करेगी लेकिन समय की मार ने हंसी को सड़क पर ला कर रख दिया ,हंसी को हरिद्वार की सड़कों पर,रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, गंगा के किनारे कई लोगो ने भीख मांगते देखा है। साल 2011 हंसी की ज़िंदगी पलट देगा खुद हंसी ने भी नही सोचा होगा,हालांकि अपनी निजी जिंदगी के बारे में हंसी कम ही किसी को कुछ बताती है इसकी वजह उनके जीवन का कोई भी बुरा असर उनके परिवार पर पड़े ये वो कतई नही चाहती।हंसी की ज़िंदगी उनकी शादी के बाद ही बदल गयी शादी के बाद घरेलू विवाद बढ़ गए कि वो हरिद्वार आ  गईं और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने लगी,परिवार से अलग हो गयी,लेकिन इस दौरान उनकी तबियत बिगड़ने लगी,और कहीं भी नौकरी करने में खुद को सक्षम महसूस नही कर पाई,उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री को अपनी दशा के बारे में पत्र भी लिखे लेकिन पत्रों की कोई प्रतिक्रिया सामने नही आई, ऐसी हालत में हंसी अपने 6 साल के बेटे का भी भरण पोषण कर रही हैं,हंसी के दो बच्चे है बेटी अपनी नानी के साथ रहती है और बेटा हंसी के साथ फुटपाथ पर जीवन काट रहा है,हंसी पढ़ी लिखी है इसीलिए अपने बेटे को वो इंग्लिश, हिंदी,संस्कृत,पढ़ाती है।हंसी अपनी दयनीय स्थिति के लिए कई बार सचिवालय और विधानसभा के भी चक्कर काट चुकी है वो कहती है कि अगर सरकार मदद करे तो वो बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकती हैं।


आपको बता दें कि हंसी प्रहरी उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर क्षेत्र के हवालबाग ब्लॉक के अंतर्गत गोविंदपुर के पास रण खिला गांव की रहने वाली है,इसी गांव में उनका बचपन अपने भाई बहनों के साथ बिता हंसी पांचों भाई बहनों में सबसे बड़ी है ,हंसी शुरू से पढ़ाई में तेज थी इस वजह से वो चर्चा में भी रहती थी।हंसी ने आगे की पढ़ाई कुमाऊं यूनिवर्सिटी से की,साल 1998-99 में वो खूब चर्चाओ में रही उन्होंने छात्र यूनियन के चुनाव में छात्रा उपाध्यक्ष का पद जीता हंसी विवि में चार साल लाईब्रेरियन भी रहीं,हंसी के मुताबिक उन्हें विवि में जॉब भी मिली थी क्योंकि वो विवि में होने वाले हर तरह के एजुकेशनल कॉम्पटीशन में भाग लेती थी,डिबेट से लेकर कल्चरर प्रोग्राम इत्यादि में अक्सर प्रथम भी आती थीं। कुमाऊं यूनिवर्सिटी की मेधावी छात्रा और पूर्व छात्रा उपाध्यक्ष आज दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। 


ऐसे में सवाल उठता है कि कौन हंसी के प्रति संवेदनहीन है ? 

जिसके साथ हंसी ने शादी की वो? 

जिस घर मे हंसी ने जन्म लिया था वो? 

जिस राज्य सरकार के मुख्यमंत्री को मदद की गुहार के लिए कई बार पत्र लिखे वो? 

सचिवालय? 

विधानसभा? 

या फिर ये समाज जो आप और हम से बनता है ?


ऐसे कई सवालों से अक्सर वो सभी पल्ला झाड़ लेते है जो समाजसेवक होने की डींगे मारते है। एक पड़ी लिखी नारी को दो वक्त की रोटी भी भीख मांगकर कमानी पड़े तो तो सवाल केवल मौजूदा सरकार से नही उत्तराखंड बनने से लेकर अब तक कि सभी सरकारों से है ,जिनके लिए एक आम आदमी केवल वोट बैंक की तरह होता है जो वोट देने तक काम का है और वोट के बाद बेकाम का , जिनमें एक प्रत्यक्ष उदाहरण हंसी प्रहरी का है ,और ऐसे कई उदाहरण गाहे बगाहे सड़क नापते नजर आ ही जाते है जो बेराजगारी और सरकारी की गलत नीतियों के शिकार होते है और दयनीय जिंदगी गुजारते है और इनका अंत गुमनामी के साथ हो जाता है ।







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