नई शिक्षा प्रणाली में 12 और 15 के आंकड़ों से कंफ्यूज़ ना हो एक क्लिक में समझे पूरे पाठ्यक्रम को

avatar

Reported by Kanchan Verma

On 30 Jul 2020
नई शिक्षा प्रणाली में 12 और 15 के आंकड़ों से कंफ्यूज़ ना हो एक क्लिक में समझे पूरे पाठ्यक्रम को

शिक्षा नीति को 34 साल के लंबे इतिहास के बाद अब बदला गया है पूरे देश मे 10वी की बोर्ड्स परीक्षाओं को अब बन्द कर दिया गया है साथ ही कक्षा 5 तक मातृ भाषा मे पढ़ाई अनिवार्य कर दी गयी है।अब तक देश मे 10+2 के अनुसार पाठ्यक्रम रहा था लेकिन अब 5+3+3+4 के अनुसार पूरे देश मे पाठ्यक्रम चलेगा,इसी नई नीति को लोग समझ नही पा रहे हैं और सोशल मीडिया में इन आंकड़ों पर बहसबाजी शुरू हो गयी है ज़्यादातर लोग कह रहे हैं कि अब तक  10+2 यानी कक्षा 12 तक पढ़ाई की जाती थी लेकिन अब नई नीति के अनुसार 5+3+3+4= 15 साल की पढ़ाई होगी,ये बोझ घटा या बढ़ा?और इस तरह सरकार को विद्यार्थियों के ऊपर 3 साल का अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ डालने का आरोप लगा रहे हैं ।


सोशल मीडिया में वायरल हो रही पोस्ट का एक नमूना 


दरअसल जो लोग इन आंकड़ों के जोड़ को 15 पढ़ रहे हैं वो गणित के हिसाब से सही भी है लेकिन इसको दूसरे ढंग से अगर समझोगे तो शायद जान पाओगे की सरकार की नई शिक्षा प्रणाली आखिर है क्या। चलिए आवाज़ 24x7 के माध्यम से आप भी जानिए कि ये आंकड़ों का खेल आखिर है क्या।

नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है,अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब ये 5+ 3+ 3+ 4 के हिसाब से होगा। इसका मतलब है कि प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा। यहां समझें कि क्या है 5+3+3+4 फार्मेट का सिस्टम- 

सबसे पहले फाउंडेशन स्टेज पर नन्हे मुन्नों को खेल कूद करवाते हुए पढ़ाई करवाई जाएगी यानी

पहले तीन साल बच्चे आंगनबाड़ी में प्री-स्कूलिंग शिक्षा लेंगे, फिर अगले दो साल क्लास वन और टू में बच्चे स्कूल में पढ़ेंगे। इन पांच सालों की पढ़ाई के लिए एक नया पाठ्यक्रम तैयार होगा। मोटे तौर पर एक्टिविटी आधारित शिक्षण पर ज़्यादा ध्यान रहेगा, इसमें तीन से आठ साल तक की आयु के बच्चे कवर होंगे,इस प्रकार पढ़ाई के पहले पांच साल का चरण पूरा होगा,अब आप पहले 5 का सीधा जवाब जान गए चलिए अब अगले 3 साल को भी जानते है

दूसरे नम्बर पर प्रीप्रेटरी स्टेज/चरण आता है ,इस चरण में कक्षा तीन से पांच तक की पढ़ाई होगी। इस दौरान प्रयोगों के जरिए बच्चों को विज्ञान, गणित, कला आदि की पढ़ाई कराई जाएगी, आठ से 11 साल तक की उम्र के बच्चों को इसमें कवर किया जाएगा।फिर आएगा मिडिल स्टेज/चरण

इसमें कक्षा 6-8 की कक्षाओं की पढ़ाई होगी तथा 11-14 साल की उम्र के बच्चों को कवर किया जाएगा, इन कक्षाओं में विषय आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा,कक्षा छह से ही कौशल विकास कोर्स भी शुरू हो जाएंगे।फिर आएगा सेकेंडरी स्टेज/चरण जिसमे कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई दो चरणों में होगी जिसमें विषयों का गहन अध्ययन भी कराया जाएगा,और पहले की ही तरह विषयों को चुनने की आजादी भी होगी।अब तो समझ गये ना ? 

दरअसल पहले सरकारी स्कूलों में प्री-स्कूलिंग नहीं थी, कक्षा एक से 10 तक सामान्य पढ़ाई होती थी। कक्षा 11 से विषय चुन सकते थे।



नई शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने के लिए बनाई गई समिति का नेतृत्व कर रहे डॉ. कस्तूरीरंगन ने कहा, अब छठी कक्षा से ही बच्चे को प्रोफेशनल और स्किल की शिक्षा दी जाएगी, स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी कराई जाएगी। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति बेरोजगार तैयार नहीं करेगी। स्कूल में ही बच्चे को नौकरी के जरूरी प्रोफेशनल शिक्षा दी जाएगी।दसवीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में बड़े बदलाव किए जाएंगे, बोर्ड परीक्षाओं के महत्व को कम किया जाएगा, साथ ही कई अहम सुझाव हैं, जैसे साल में दो बार परीक्षाएं कराना, दो हिस्सों वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव) और व्याख्त्मक श्रेणियों में इन्हें विभाजित करना आदि। बोर्ड परीक्षा में मुख्य जोर ज्ञान के परीक्षण पर होगा ताकि छात्रों में रटने की प्रवृत्ति खत्म हो। बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्र हमेशा दबाव में रहते हैं और ज्यादा अंक लाने के चक्कर में कोचिंग पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन भविष्य में उन्हें इससे मुक्ति मिल सकती है। शिक्षा नीति में कहा गया है कि विभिन्न बोर्ड आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं के प्रैक्टिकल मॉडल को तैयार करेंगे। जैसे वार्षिक, सेमिस्टर और मोड्यूलर बोर्ड परीक्षाएं। 

नई नीति के तहत कक्षा तीन, पांच एवं आठवीं में भी परीक्षाएं होगीं,जबकि 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं बदले स्वरूप में जारी रहेंगी।







0 0