नैनीताल : कत्यूरी राजवंश की वीरांगना जियारानी की याद में रानीबाग में लगता है मकर संक्रांति पर मेला रात भर चलता है जागरण

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Reported by Awaaz Desk

On 13 Jan 2021
नैनीताल : कत्यूरी राजवंश की वीरांगना जियारानी की याद में रानीबाग में लगता है मकर संक्रांति पर मेला रात भर चलता है जागरण

भारत की कई वीरांगनाओं ने स्वर्णिम इतिहास रचा है जिनमे झांसी की रानी,सिंध के दीवान गुन्दुमल की बेटी,महारानी पद्मिनी,रानी दुर्गावती ,रानी कर्णावती,जीजा बाई,राजकुमारी रत्नावती,उत्तराखंड की महारानी जियारानी और न जाने कितने नाम शामिल है।उत्तराखंड के सूर्यवंशी कत्यूरी वंशज आज भी जियारानी नैनीताल के रानीबाग में आकर पूजा अर्चना करते हैं।जियारानी को का नाम भी स्वतंत्रता संग्राम के पृष्ठों पर सुर्खियों में छाया रहता पर कुछ कतिपय कारणों की वजह से उन्हें  वो स्थान नही मिल पाया जो अन्य वीरांगनाओं को दिया गया।

आज उत्तराखंड में मकर सक्रांति और लोहड़ी का त्यौहार मनाया जा रहा है हर साल मकर सक्रांति पर रानीबाग में जियारानी की याद में रातभर जागरण इत्यादि का कार्यक्रम चलता है,और मेले का आयोजन किया जाता है आज से यह मेला दो दिन तक लगेगा। श्रद्धालु गार्गी नदी में स्नान कर यहां चित्रशिला और जियारानी के गुफा के दर्शन करेंगे।

जियारानी के संबंध में एक किंवदंती जुड़ी हुई है। जियारानी कत्यूरियों के सैंतालिसवें महाराजा प्रीतम देव की महारानी थीं। लगभग आठ-दस पीढ़ियों तक साम्राज्य करने के बाद इस राजवंश की शक्ति धीरे-धीरे घटने लगी। चंद्रवंशी राजाओं ने आक्रमण करना शुरू कर दिया। किंवदंती के अनुसार राजा प्रीतम देव के राज्य में रोहिल्लों ने आक्रमण कर दिया। इस पर जियारानी ने सोचा किसी प्रकार राजमहल से बाहर निकलने में ही कल्याण है। वह रानीबाग आ गईं और यहीं गुफा में रहने लगीं। यहां उन्होंने अपनी सेना का भी गठन किया। रोहिल्ले रानी का पीछा करते हुए यहां तक आ पहुंचे। रानी नदी में स्नान कर अपना घाघरा पत्थर पर रखने के बाद गुफा में चली गई। सिपाहियों ने देखा कि शिला पर रानी का घाघरा रखा हुआ है। जब वे घाघरा उठाने लगे तो देखा कि यह घाघरा नहीं शिला है। वे अचंभित थे कि यह देखने में घाघरा और छूने में पत्थर प्रतीत हो रहा है। क्षेत्र के युवा दीपक नौगाईं ‘अकेला’ बताते हैं कि घाघरे की आकृति लिए यह शिला आज भी यहां है और इस शिला को ही चित्रशिला कहा जाता है। इस शिला को रानी के सतीत्व एवं पतिव्रत धर्म के रूप में पूजा जाता है। रानीबाग में ही गार्गी में सुभद्रा नदी का संगम है।

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Anuj Awasthi

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