पत्रकार उत्पीड़न:मित्र पुलिस बनी शत्रु पुलिस कुँवर की कप्तानी में नहीं रुक रहा पत्रकारों पर पुलिस का अत्याचार

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Reported by Awaaz Desk

On 22 Mar 2021
पत्रकार उत्पीड़न:मित्र पुलिस बनी शत्रु पुलिस कुँवर की कप्तानी में नहीं रुक रहा पत्रकारों पर पुलिस का अत्याचार

रुद्रपुर में जबसे पुलिस कप्तान का पद भार दलीप सिंह कुँवर ने संभाला है तब से मित्र पुलिस का रवैया शत्रु पुलिस का बनता जा रहा है और खास तौर पर निर्भीक पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों पर पुलिस का उत्पीड़न कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है । उधम सिंह नगर जिला वैसे ही पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर विवादित रहता है उसके ऊपर आग में घी डालने का काम एसएसपी दलीप सिंह कुँवर कर रहे है बीते तीन दिनों में पुलिस की उपस्थिति में जो घटनाए हुई है उनको लेकर ऐसा लगता है पुलिस जनता की सेवक नहीं कुछ और ही बनती जा रही है जब भी कोई फरियादी शिकायत लेकर थाना या चौकी पहुंचता है तो वहाँ के प्रभारी शिकायत दर्ज़ करने की बजाय या तो समझौता कराने पर दबाव डालते है और अगर फरियादी दबाव में नहीं आता तो सीधे फरियादी पक्ष  और दूसरे पक्ष का 107/116 में चालान कर देते है ऐसे कई उदाहरण उधम सिंह नगर पुलिस चौकी और थाने में अभी भी जीवंत मिलेंगे । 

दो दिन पूर्व एक निजी चैनल का पत्रकार रात लगभग 11 बजे में लौट कर घर जा रहा था तभी पड़ोस में घात लगाए उनके ही दो रिश्तेदार जो पहले से पत्रकार से रंजिश रखे हुए थे उन्होने अचानक से हमला कर देते है  जिससे पत्रकार के सर पर काफी चोटें आ जाती है और पत्रकार भागकर अपनी जान बचाता है और मदद के लिए सीधा संबन्धित पुलिस चौकी आवास विकास जाता है  जहां आवास विकास चौकी प्रभारी दिनेश फर्त्याल पत्रकार की शिकायत को नज़रअंदाज़ कर तत्काल उसका चिकित्सा परीक्षण करवाते है  और उल्टा उस पर ही हाथ छोड़ देते है  और चिकित्सा परीक्षण का हवाला देकर उल्टे पत्रकार पर ही आरोप मढ़ देते है कि पत्रकार झूठ बोल रहा है इसे चोटें नहीं आई है जबकि असल में पत्रकार के सर पर वार हुआ था जिसका सीटी स्कैन सरकारी अस्पताल में नहीं किया गया और मेडिकल करवाने के बाद बतौर पत्रकार चौकी इंचार्ज दिनेश फर्त्याल ने उस पर हमला भी किया । पत्रकार द्वारा चैनल प्रभारी को सूचना देने के बाद जब चैनल प्रभारी एसएसपी दलीप सिंह कुँवर को मामले से अवगत कराते है तो एसएसपी कुँवर द्वारा उसी वक़्त सीओ सिटी अमित कुमार को आवास विकास चौकी भेजा जाता है  जहां निजी चैनल के पत्रकार की शिकायत को दर किनार करके एसएसपी के आदेशानुसार दोनों पक्षों के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 107/116 की कार्यवाही कर दी जाती है । 

अब इसमें सबसे बड़ा सवाल उठता है कि पत्रकार की शिकायत को क्यों नहीं दर्ज़ किया गया ? चौकी प्रभारी द्वारा पत्रकार पर हमला करने की जांच क्यो नहीं की गयी ? क्या वास्तव में पत्रकार उत्पीड़न सोची समझी साजिश के तहत तो नहीं किया जा रहा ? कुछ दिन पूर्व जब पत्रकार द्वारा तहरीर दी गयी थी तो पुलिस ने सुलह के लिए पत्रकार पर दबाव क्यों बनाया  ? क्या पुलिस 107/116 के गलत प्रयोग से फरियादी को डराकार थाने में शिकायतों को कम करना चाहती है ? बतौर पत्रकार का कहना है कि कुछ माह पूर्व एक खुलासे की खबर के कारण आवास विकास चौकी के दो सिपाही निलंबित किए गए थे जिससे आवास विकास चौकी प्रभारी दिनेश फर्त्याल पत्रकार से रंजिश रखने लगे थे और मौका मिलते ही उन्होने पत्रकार पर हाथ छोड़कर रंजिश भी निकाल दी ।

और जब इसके बाबत आवास विकास चौकी प्रभारी दिनेश फर्त्याल से बात की गयी तो उन्होने पत्रकार के आरोपों को निरधार बता डाला जबकि उस रात पत्रकार के चेहरे से साफ झलक रहा था कि उसके साथ मारपीट तो की गयी है और टी शर्ट में लगा खून भी सारी कहानी खुद ही कह रहा था । आधी रात दो घंटे चले इस पूरे मामले में सीओ सीटी अमित कुमार और अन्य पुलिस कर्मियों ने पूरे प्रकरण की जांच करने की भी जरूरत नहीं समझी । विशेषकर पुलिस सीआरपीसी 107/116 का प्रयोग उस वक़्त करती है जब भविष्य दो पक्षों मे मारपीट की संभावना होती है सीआरपीसी 107/116 की कार्यवाही वैसे तो दंडात्मक न होकर निरोधात्मक होती है इन धारा की अधिकतम सीमा एक वर्ष तक होती है लेकिन व्यावहारिक रूप में मजिस्ट्रेट छः माह तक के लिए ही लागू करते है ।

इसी तरह से एक दिन पूर्व भी मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार भरत साह पर पुलिस की ओर से बिना जांच कर सरकारी कार्यो में बाधा डालने सहित अन्य आरोप में झूठे केस दर्ज करने से पुलिस पर ही सवालिया निशान खड़े होते हैं,पत्रकारो के साथ आये दिन पुलिस की बदसलूकी के मामले सामने आते हैं, भरत साह के साथ हुई मारपीट मामले में भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज़ नहीं किया था और उल्टा ही पत्रकार भरत साह पर मुकदमा दर्ज़ कर दिया था नौबत यहा तक आ गयी कि पत्रकारों ने अर्धनग्न होकर पुलिस कैंप कार्यालय में प्रदर्शन भी किया था और आमरण अनशन की धमकी भी दी थी जिस कारण एसएसपी दिलीप सिंह कुँवर को पीछे हटना पड़ा और मुकदमा वापस लेना पड़ा बात यही पर नहीं रुकी अब डीआईजी कुमायूं अजय रौतेला ने पत्रकारों के उत्पीड़न पर जांच बिठा दी है अब देखना ये खास होगा कि क्या पुलिस निष्पक्ष तौर पर जांच करेगी और क्या दोषी पुलिस वालों पर कार्यवाही करेगी ?

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