प्रवासी मजदूरों के लिए काल बन गया कोरोना लॉकडाउन

avatar

Reported by Tapas Vishwas

On 20 May 2020
प्रवासी मजदूरों के लिए काल बन गया कोरोना लॉकडाउन

लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है कोरोना महामारी के बीच भूख प्यास और बेरोजगारी से हताश - निराश मजदूरों के हिस्से हादसे से भी आए हैं  मजदूर साइकिल बस ट्रक या फिर लाखों मील की दूरी पैदल ही तय कर घर पहुंचने के लिए पहाड़ तोड़ मशक्कत की है । लेकिन इस जद्दोजहद के बीच रास्ते में होने वाले सड़क हादसे मजदूरों के लिए काल बन चुके हैं देश के अलग-अलग राज्यों के कई प्रवासी मजदूरों का सफ़र घर पहुंचने से पहले ही खत्म हो गया ।


 देश में कोरोनावायरस से मरने वालों का आंकड़ा तो हमें मिल पा रहा है लेकिन कोरोनावायरस के कारण मरने वाले वालों के आंकड़ों में शायद ना मिल पाए ।  ऐसा लग रहा है कि देश वासियों और विशेषकर प्रवासी मजदूरों के लिए कोरोना महामारी काल से भिड़ने जैसा युद्ध बन गया है ।जिंदगी बचाने के लिए प्रवासी मजदूर किसी न किसी तरह बस अपने घर पहुंचना चाहते हैं लेकिन उसमें कुछ ऐसे भी हैं जिनको घर तो नसीब हुआ ही नहीं साथ ही मौत भी बहुत बुरी आई है ।



कोरोना वायरस संकट और लॉकडाउन प्रवासी मजदूरों के लिए दोहरी मुसीबत की तरह है और यह उनके लिए काल बन गया है। लॉकडाउन में रोजी-रोटी की जद्दोजहद और घर लौटने की कोशिश में अब तक करीब 160 से अधिक प्रवासी मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं। विभिन्न राज्यों से आई आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन जब से शुरू हुआ है तब से लेकर अब तक कम से कम 162 मजदूरों की अलग-अलग सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। 


25 मार्च को लॉकडाउन की शुरुआत के बाद से ऐसे दुर्घटनाओं में कम से कम 162 प्रवासियों की मौत हो गई है। पिछले एक पखवाड़े में ही सिर्फ दो बड़े हादसों में 42 प्रवासी मजदूरों की मौत हुई है। 8 मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल पटरी पर आराम कर रहे प्रवासियों को मालगाड़ी ने रौंदा था, जिसमें करीब 16 मजदूरों की मौत हो गई थी।

0 0