बनभूलपुरा पुलिस का कारनामा फर्जी एफआईआर कर भेज दी शासन और एसएसपी नैनीताल को

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Reported by Awaaz Desk

On 4 Jul 2020
बनभूलपुरा पुलिस का कारनामा फर्जी एफआईआर कर भेज दी शासन और एसएसपी नैनीताल को

“पुलिस” एक ऐसा शब्द जो देश के प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षा और कानून व्यवस्था का एहसास दिलाता है भारत में केंद्र शासित राज्यों को छोड़कर पुलिस राज्य सरकार के निर्देशन में कार्य करती है और राज्य  में कानून व्यवस्था सुचारु रखती है आए दिन जाबांज पुलिस वालों का उदाहरण देखने को मिलता रहता है लेकिन कुछ समय से समाज में पुलिस का एक नया चेहरा भी सामने आया है जहां आए दिन घूसख़ोरी, राजनैतिक दबाव, भेदभाव आदि संभावित कारणों से पुलिस की कार्यप्रणाली प्रभावित होते हुए दिखती है । 

मामला हल्द्वानी के बनभुलपुरा क्षेत्र का है जहां अब्दुल वहाब नामक एक व्यक्ति 31 मई 2020 शाम 5:30 बजे हमजा मस्जिद के पास से पैदल गुजर रहा था अचानक कांग्रेसी पार्षद जाकिर फूलवाला ने स्कूटी से अब्दुल को टक्कर मार दी जिस पर अब्दुल वहाब द्वारा विरोध किया गया तो कांग्रेसी पार्षद को विरोध इस कदर बुरा लगा कि उसने अपने बेटे जावेद और कुछ लोगों को बुलाकर अब्दुल वहाब पर जानलेवा हमला कर दिया जिसमें अब्दुल वहाब के सर पर गहरी चोट आई और बीच बचाव में आए रेहान पर भी डंडों सरिया और लोहे की रौड आदि से प्रहार किया गया जिस कारण रेहान की टांग तीन जगह से टूट गयी, साथ ही अब्दुल वहाब का मोबाइल और पर्स आदि भी लूट लिए गए, कांग्रेसी पार्षद और उनकी टीम ने इस कदर दोनों को मारा जिससे उनकी जान भी जा सकती थी, खैर अब्दुल वहाब किसी तरह अपने जीजा रिजवान अली के साथ बनभुलपुरा थाने पहुंचा तो पुलिस ने उसकी प्राथमिकी भी दर्ज़ नहीं की गयी ।

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जब पीड़ित के जीजा रिजवान को लगा पुलिस पार्षद के दबाव में है तो रिजवान अली ने सीएम पोर्टल पर 4 जून 2020 को शिकायत दर्ज़ करवायी जिसका शिकायती नंबर 75937 है और जिसमें निराकरण बिन्दु पर उप निरीक्षक धरम सिंह के द्वारा विवेचना का उल्लेख मिलता है और एफआईआर नंबर 224/2020 में आईपीसी की धारा 324/504/506/394 का विवरण मिलता है और जिसकी सूचना नैनीताल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दी गयी ।

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आवाज़ उत्तराखंड ने जब तफतीश शुरू की और जानकारी लेनी चाही तो बनभुलपुरा पुलिस की काली करतूत सामने आने लगी जैसे कि एफआईआर नंबर 224/2020 में आईपीसी की धारा 324/504/506/394 का विवरण मिलता है और जो बनभुलपुरा थाने से एसएसपी नैनीताल को प्रेषित की गयी थी लेकिन एफआईआर संख्या 224/2020 पर जो एफआईआर पंजीकृत है वो 4 जून को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा होटल से समान की चोरी की है जिसमें शिकायतकर्ता का नाम सुमित तिवाड़ी है और जो हीरा नगर का रहने वाला है ।

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अब बनभुलपुरा पुलिस ने जो एफआईआर रिजवान अली को थमाई वो 7 जून 2020 को की गयी है जिसमें पूरा विवरण है लेकिन एक संगीन धारा 394 गायब है 7 जून को की गयी एफआईआर के अनुसार एफआईआर संख्या 0225 है और जिसमें आई पी सी की धारा 323/504/506 अंकित है ।

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अब बनभुलपुरा पुलिस पर कई सवाल खड़े होते है जैसे जब अब्दुल वहाब को लेकर रिजवान अली एफआईआर दर्ज़ करवाने बनभुलपुरा चौकी गया तो उसकी एफआईआर दर्ज़ क्यों नहीं की गयी ?

सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज़ करने के पश्चात झूठी एफआईआर की सूचना एसएसपी नैनीताल को भेज कर गुमराह क्यों किया गया ?

कांग्रेसी पार्षद को बचाने और एक गरीब सताये हुए व्यक्ति की फरियाद न सुनने के पीछे का क्या काला सच हो सकता है ?

आईपीसी की धारा 394 जो कि एक गैर जमानती धारा है उसे वास्तविक एफआईआर से हटाने का क्या मतलब हो सकता है ?

बनभुलपुरा थाना प्रभारी के अलावा एसआई धरम सिंह और एसआई मनोज सिंह बार बार रिजवान अली को समझौते के लिए क्यों दबाव बना रहे है ?

अब हम आपको अवगत कराते है बनभुलपुरा थाना प्रभारी सुशील कुमार के बारे में सुशील कुमार कुछ साल पहले उधम सिंह नगर जिले के ट्रांज़िट कैंप थाने के प्रभारी थे जहां निडर होकर वो अवैध शराब कारोबारियों को शह दिया करते थे सुशील कुमार के राज में ट्रांज़िट कैंप क्षेत्र में नशे का कारोबार जबर्दस्त फल फूल रहा था लेकिन उसी वक़्त उधम सिंह नगर एसएसपी सदानन्द दाते की नजर सुशील कुमार पर पड़ गयी और सदानंद दाते ने सुशील कुमार को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एक प्लान बनाया जिसमें खुद सदानंद दाते एक शराबी का भेष बना कर ट्रांज़िट कैंप क्षेत्र पहुंचे और सुशील कुमार की अवैध गतिविधियों के चलते सुशील कुमार को लाईन हाजिर कर दिया , लेकिन ऐसा लगता है कि सुशील कुमार जैसे पुलिस अधिकारियों ने न सुधारने की कसम खा रखी है जिसका ये दुष्परिणाम सामने आ रहा है और यही वजह है कि उत्तराखंड पुलिस जनता के बीच में अपनी शाख खोती जा रही है , चंद पुलिस अधिकारियों की वजह से पूरा पुलिस महकमा बदनाम होता है , अब समय आ गया है कि पुलिस विभाग अपनी वो शपथ फिर से याद करें जो वो पुलिस अधिकारी बनते समय खाता है ।

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