बेरोजगारी से त्रस्त नौजवान ने की आत्महत्या और आपका विज्ञापन कहता है 7 लाख रोजगार मिले ?

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Reported by Awaaz Desk

On 21 Sep 2020
बेरोजगारी से त्रस्त नौजवान ने की आत्महत्या और आपका विज्ञापन कहता है 7 लाख रोजगार मिले ?

उत्तराखंड की ज़ीरो टॉलरेंस की सरकार लाख दावे कर ले कि उनकी सरकार ने राज्य में लाखों लोगों को रोजगार दिया है लेकिन ज़मीनी हकीकत यही है कि बेरोजगारी की वजह से राज्य में लोग आत्महत्या कर रहे हैं ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सामने आया जब बेरोजगारी की वजह से एक युवक ने आत्महत्या कर ली ।


मामले के अनुसार युवक का नाम ऋषभ था और कुछ ही महीनों पहले उसकी शादी हुई थी,ऋषभ कोचिंग सेंटर चलाता था लेकिन कोरोना महामारी की वजह से पिछले 6 महीनों से उसका कोचिंग सेंटर बन्द पड़ा था,जिसकी वजह से ऋषभ के ऊपर आर्थिक संकट आ पड़ा। पैसों की तंगी की वजह से ऋषभ मानसिक रूप से परेशान रहने लगा और शनिवार को एक सुसाइड नोट लिख कर ऋषभ ने आत्महत्या कर ली।सुसाइड नोट में ऋषभ ने 12 लाइन्स लिखी थी कि- 


"अनिम्प्लॉईमेंट इस द रीजन बिहाइंड दीस, "Unemployment is the reason behind this "


मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि श्वेता जैसी लड़की मेरी ज़िन्दगी में आयी, आई ऑलवेज लव एंड रिस्पेक्ट हर,आई एम सॉरी श्वेता, भैया पापा मम्मी कि मैं ऐसा कर रहा हूँ,प्लीज मुझसे कभी नफरत मत करना,मुझे आराम चाहिए और यही रास्ता मुझे नज़र आया ,आई एम सॉरी एंड आई लव यू ऑल"

ये सब लिखकर ऋषभ ने आत्महत्या कर ली फ़िलहाल पटेलनगर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।



गौरतलब है कि कोरोना काल मे लाखों लोगों के आगे रोजगार का संकट गहरा गया है और सूबे के मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल पर वर्चुअल प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा है कि अप्रैल 2017 से सितम्बर 2020 तक विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 7 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया गया, इनमें से नियमित रोजगार लगभग 16 हजार, आउटसोर्स/अनुबंधात्मक रोजगार लगभग 1 लाख 15 हजार और स्वयं उद्यमिता/प्राईवेट निवेश से प्रदान/निर्माणाधीन परियोजनाओं से रोजगार लगभग 5 लाख 80 हजार है।


अगर वास्तव में इतने लोगो को रोजगार मिला है तो युवा आत्महत्या जैसा कदम क्यो उठा रहे हैं? आपको बता दें कि उत्तराखंड की ज़ीरो टॉलरेंस की सरकार पर अपनो को बैक डोर से नौकरी देने के आरोप आये दिन लगते रहते हैं ऐसे में राज्य के युवाओं को खुद को छला हुआ महसूस होता है।




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