ब्रेकिंग:आज़ाद भारत में फाँसी पर चढ़ने वाली पहली महिला शबनम के अलावा ये तीन महिलाए भी पा चुकी है फांसी की सज़ा

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Reported by Awaaz Desk

On 23 Feb 2021
ब्रेकिंग:आज़ाद भारत में फाँसी पर चढ़ने वाली पहली महिला शबनम के अलावा ये तीन महिलाए भी पा चुकी है फांसी की सज़ा

आज़ाद भारत में फांसी पर चढ़ने वाली पहली महिला शबनम के अलावा तीन अन्य महिलाए जिनका जुर्म भी शबनम से कम नहीं है । आज़ाद भारत में फांसी की सजा पाने वाली चार महिलाओं में हरियाणा की सोनिया,उत्तर प्रदेश की शबनम,और महाराष्ट्र की रेणुका और सीमा है जिनकी फांसी अभी लंबित है इनमें से शबनम को सबसे पहले फांसी दी जाएगी ।

शबनम जिसने कुल्हाड़ी से अपने परिवार के ही सात लोगों को काट डाला था और जिसे जल्द ही फांसी पर लटका दिया जाएगा :




उत्तर प्रदेश की शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के सात लोगो की निर्मम हत्या कर दी थी,उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में स्थित बावनखेड़ी गाँव की निवासी शबनम ने 15 अप्रैल 2008 को रात के लगभग डेढ़ बजे प्रेमी सलीम के साथ अपने ही परिवार के सात लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या कर दी थी जिसमें एक आठ माह का बच्चा भी था और उस वक़्त शबनम खुद 7 माह की गर्भवती थी । सत्र नयायालय के द्वारा फांसी की सजा सुनने के बाद शबनम के मामले को उच्च न्यायालय इलाहाबाद और उच्चतम न्यायालय के सामने लाया गया जहां दोनों न्यायालय द्वारा शबनम की फांसी की सज़ा को बरकरार रखा गया पिछले 10 साल से शबनम मुरादाबाद की जेल में बंद है और शबनम का प्रेमी सलीम आगरा सेंट्रल जेल में बंद है । शबनम के गाँव वाले बेसब्री के साथ शबनम की फांसी का इंतजार कर रहे है गाँव वालों का मानना है न्याय तब ही मिलेगा जब शबनम को फांसी होगी । शबनम और सलीम का बच्चा  11 वर्ष का हो चुका है जिसका लालन पालन बुलंदशहर का एक परिवार कर रहा है । शबनम 35 वर्ष की हो चुकी है और घटना को भी 10 वर्ष बीत चुके है शबनम की फाँसी की तैयारी चल रही है शबनम आज़ाद भारत की पहली महिला होगी जिसे फाँसी दी जाएगी ।

 

सोनिया जिसने अपने विधायक पिता समेत आठ लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी :



 

हरियाणा की सोनिया ने अपने पिता समेत आठ लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी सोनिया के पिता रेलुराम हिसार के विधायक थे संपत्ति के लालच में 23 अगस्त 2001 को सोनिया और उसके पति संजीव ने मिलकर रेलुराम समेत परिवार के आठ लोगों की हत्या कर दी थी जिसके बाद 2004 में सत्र न्यायालय द्वारा सोनिया को फांसी की सज़ा सुनाई गयी लेकिन 2005 में उच्च न्यायालय द्वारा सोनिया की सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया गया था जिसके बाद  2007 में उच्चतम न्यायालय ने समीक्षा याचिका (review petition) की सुनवाई करने पर उच्चतम न्यायालय ने सत्र न्यायालय के द्वारा सोनिया को दी गयी फांसी की सज़ा को बरकरार रखने का फैसला किया जिसके बाद सोनिया और उसके पति संजीव ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका (pardon petition) लगाई थी उस वक़्त के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने दया याचिका को ख़ारिज़ कर दिया था चूंकि अभी तक सोनिया का मौत का हुक्म (death warrant) जारी नहीं हुआ है इसलिए अभी तक सोनिया को फांसी नहीं दी जा सकी है ।

 

रेणुका और सीमा दो सगी बहनें जो 42 बच्चों की मौत के जिम्मेदार है :




 

महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली रेणुका और सीमा दोनों बहनों ने कई मासूमों की जानें ली है अभी ये दोनों बहने 23 वर्ष से पुणे की यरवाड़ा जेल में बंद है यरवाड़ा जेल में ही अजमल कसाब को फाँसी दी गयी थी और अभिनेता संजय दत्त भी इसी जेल में बंद रहे थे । 23 वर्ष से बंद ये दोनों सगी बहनें जिनमें रेणुका बड़ी और सीमा छोटी बहन है इन पर आरोप है की इन्होने 42 बच्चों की हत्या की है इन हत्यावों में इनकी माँ अंजाना गावित भी दोषी थी जिसकी बीमारी के चलते जेल में ही मौत हो चुकी है अंजना गावित मूलतः नासिक की रहने वाली थी और ये अपनी दोनों बेटियों के साथ मिलकर बच्चे चुराकर चोरी करने का काम करती थी इनका मानना था कि अगर चोरी करते वक़्त पकड़े जाए तो लोग बच्चे को देखकर छोड़ देते है , बच्चे चुराते वक़्त अगर पकड़ी जाती थी तो ये बच्चे को पटक देती थी जिससे लोगों का ध्यान इन पर से हट जाता था बाद में जब बच्चा काम का नहीं रहता था तो ये बच्चे को पटक पटक कर मार देती थी इस तरह ये तीनों खतरनाक सिरियल किलर थी ये 1990 से लेकर 1996 तक ये इन लोगों ने लगभग 42 बच्चों की हत्याएँ करने का आरोप है  । उस वक्त ये मामला सुर्खियों में बना रहा,

इस तरह की सिरियल किलिंग का ये मामला अपने आप में दिल दहला देने वाला है ये सिरियल किलिंग का मामला भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में भी सबसे खतरनाक मामलों में से एक है इस मामले में सीआईडी को सौपा गया सीआईडी ने जांच करने पर 13 मामलों में अपहरण और 6 हत्याओं के पुख्ता सबूत भी जुटाये चूंकि जांच में सामने आया कि हत्या और अपहरण के अधिकतर मामले 1990 से 1996 के बीच हुए इसलिए कुछ मामलों में सबून नहीं मिल पाये । वर्ष 2001 में सत्र न्यायालय ने इस जघन्य अपराध के लिए दोनों बहनों को मौत की सजा सुनाई , इस मामले को लेकर जब 2004 में उच्च न्यायालय में अपील दायर की गयी तो उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय द्वारा दी गयी  मौत की सज़ा को बरकरार रखा बाद में जब सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मौत कि सजा में मुहर लगा दी ।




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