रात को ड्यूटी करते एसपीओ से पत्रकार ने की अभद्रता ! रंगदारी सेक्स रैकेट मामले में पहले भी खा चुका है जेल की हवा

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Reported by Awaaz Desk

On 23 Sep 2020
रात को ड्यूटी करते एसपीओ से पत्रकार ने की अभद्रता ! रंगदारी सेक्स रैकेट मामले में पहले भी खा चुका है जेल की हवा

 "समझ क्या रहे हो राजीव चावला को पूरी दुनिया जानती है कौन नही जानता है.....मुझे मत सिखाना पाठशाला... एसपीओ तुम अभी अभी बने हो सोलह साल से ऐसी तैसी करा रहा हूँ पत्रकारिता करता हूँ "ये तेवर खुद को पत्रकार कह रहे राजीव चावला के हैं जो कोरोना काल मे रात को ड्यूटी कर रहे एक एसपीओ प्रदीप शर्मा पर को धमकाते हुए अपनी पत्रकारिता झाड़ रहे थे ।

 

रूद्रपुर में पत्रकारिता का चीर हरण कर रहे ऐसे पत्रकार जो चौराहों पर खड़े हो कर 24 घंटे शाम काम करने वाले सिपाही और उसने सहयोगियों पर इस तरह से बिरफे जैसे वो जिले में पुलिस के बड़े अधिकारी हो हूबहू वैसा अंदाज लेकिन अब सच सुन कर आप भी दंग रह जाएंगे क्योंकि यह कोई अफसरान नही मात्र एक पोर्टल का पत्रकार है जो कि कुछ समय पहले रंगदारी मांगने सेक्स रैकेट चलाने जैसे संगीन अपराध में जेल की हवा खा कर आया है । कहते हैं कुत्ते की पूंछ को सीधी करने केलिए 12 महीने भी नली में डाल कर रखो फिर भी वो लिए वह टेढ़ी की टेढ़ी ही निकलती हैं। बिल्कुल ऐसा ही प्रत्यक्ष प्रमाण है यह घटना ।


अब आपको पूरा मामला बताते हैं दरअसल प्रदीप शर्मा लोक विहार  कालोनी निवासी को उत्तराखंड सरकार द्वारा कोरोना काल में एसपीओ के पद पर उधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर रामपुर रोड यूपी की सीमा पर तैनात किया गया था,18 सितंबर की रात लगभग साढ़े दस बजे एक कार से तीन लोग बिलासपुर की तरफ से रुद्रपुर के लिए आ रहे थे उन्हें प्रदीप शर्मा ने रोककर नियमानुसार बॉर्डर पर एंट्री कराने को कहा तो वो इतना सुनकर ही तेवर दिखाने लगे और उनमें से एक ने कहा कि मैं पत्रकार हूँ फिर एसपीओ प्रदीप शर्मा ने कहा कि ठीक है आप पत्रकार है तो अपना पहचान पत्र दिखाइए और रजिस्टर पर एंट्री करके आप जा सकते हैं,लेकिन खुद को पत्रकार कहने वाले राजीव चावला ने अपना पहचान पत्र भी नही दिखाया उल्टा एसपीओ प्रदीप शर्मा से अभद्रता और करने लगा, COVID-19 की गाइडलाइंस का भी पालन नही किया और मास्क भी नही पहना था यानी एक पत्रकार जो सरकार द्वारा जारी किए गए नियम खुद जनता तक पहुंचाता है उसने खुद ही नियमो को ताक पर रख दिया,हालांकि राजीव चावला अगर पत्रकार होता तो अपना पहचान पत्र ज़रूर दिखाता लेकिन उसने पहचान पत्र दिखाने की बजाय अपनी गुंडागर्दी ज़रूर दिखा दी,राजीव चावला यही नही रुका गुंडागर्दी दिखाते हुए उसने एसपीओ प्रदीप शर्मा को एसपीओ के पद से हटवाने तक कि धमकी दे डाली। इस पूरी घटना की एक वीडियो भी सामने आई है जिसमे राजीव चावला एसपीओ  प्रदीप शर्मा के साथ खुद को पत्रकार बताते हुए बदतमीजी कर रहा है।इ स घटना के बाद पीड़ित एसपीओ  प्रदीप शर्मा अगले दिन यानी 19 सितंबर को ड्यूटी नही गए, उनकी वर्दी भी जमा करवा ली गयी है।

 

अब बात करें राजीव चावला की तो सूत्रों के अनुसार तो ये महाशय श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उधम सिंह नगर के जिला अध्यक्ष भी है और बताया जा रहा है कई स्थानीय नेताओ से इनकी साँठ गांठ चलती है तभी तो गलती होने पर भी तत्काल कार्यवाही एसपीओ पर की गयी न कि राजीव चावला पर , अगर आपको याद हो कुछ दिन पहले ये समाचार पत्रों कि हैडलाईन की शोभा बड़ा रहे थे ।

 







आये दिन  खुद को पत्रकार बताकर गुंडागर्दी रंगदारी और ब्लैकमेलिंग करने के  मामले सामने आते रहते  हैं,जिन पर लगाम कसनी बेहद ज़रूरी है। एक पत्रकार समाज का आईना होता है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को परिभाषित करता है नियम कानून  के दायरे में रहते हुए सच को उजागर करता है समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को निभाता है लेकिन आज कल गली-गली कूचे-कूचे में खुद को पत्रकार कहते हुए ना जाने कितने लोग कभी पुलिस से झगड़ते हुए देखे जा सकते है कभी अपना रौब आम जनता पर झाड़ते हुए दिख जाते हैं जो पत्रकारिता के क्षेत्र को बदनाम करते हैं अब ऐसे स्वयंभू पत्रकारों पर नकेल कसने की सख्त जरूरत है।










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