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क्राइम : 20 साल रेप की सजा काटने के बाद कोर्ट को पता चला विष्णु ने रेप किया ही नहीं

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Reported by Awaaz Desk

On 7 Mar 2021
क्राइम : 20 साल रेप की सजा काटने के बाद कोर्ट को पता चला विष्णु ने रेप किया ही नहीं


एक ऐसे गुनाह की सजा जो गुनाह हुआ ही नहीं और समझने वाला कोई नहीं

अक्सर हम सुनते है देर से सही न्याय तो मिला । लेकिन क्या इतनी देर होने के बाद न्याय मिलने का कोई औचित्य है आज हम बात करेंगे विष्णु कि जिसने गुनाह किया भी नहीं और सजा काट दी पूरे 20 वर्ष। उत्तर प्रदेश की आगरा जेल में बंद विष्णु तिवारी के बीस साल तक रेप की सज़ा काटने के बाद हाई कोर्ट ने बताया कि विष्णु तिवारी ने रेप ही नहीं किया विष्णु उस वक़्त 23 वर्ष का था जब उस पर रेप का आरोप लगा था अब सज़ा काटें के बाद वो 43 वर्ष का अधेड़ हो चुका है विष्णु का कहना है कि गाँव में किसी से उसका जमीन को लेकर झगड़ा हो गया था जिससे कारण विपक्षियों ने किसी लड़की को पैसे देकर उस पर रेप का आरोप लगवा दिया 23 वर्ष का विष्णु अगर जेल में गया और 43 साल के बाद एक अधेड़ बनकर निकला एक बार मिली जिंदगी के 20 वर्ष विष्णु ने उस गुनाह के लिए काट दिये जो उसने किया ही नहीं हाई कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा सारे सबूतों और गवाहों की रौशनी में हम संतुष्ट हैं मिलजिम को हुई सजा पूरी तरह गलत है।

रंजिश ऐसी कि जिंदगी ही बर्बाद कर दी वो भी कानून के दायरे में

विष्णु पर उत्तरप्रदेश के ललितपुर जिले के उसके गाँव की ही एक लड़की ने रेप का इल्ज़ाम लगाया था लड़की का कहना था कि वह घर से खेत जा रही थी तब विष्णु ने उसके साथ रेप किया विष्णु 16 सितंबर 2000 को रेप और दलित उत्पीड़न के इल्ज़ाम में गिरफ्तार हुआ ललितपुर कि अदालत ने उसे उम्र कैद कि सज़ा सुना दी लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट 20 वर्ष बाद उसकी रिहाई के आदेश में लिखा है कि आरोप लगाने वाली लड़की की मेडिकल रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर ने बिलकुल साफ लिखा है कि लड़की के साथ ज़ोर जबरदस्ती जिस्मानी रिश्ते बनाने का कोई सबूत नहीं मिला है जांच में और तीनों गवाहों से पूछताछ में तमाम विरोधाभास है विष्णु का कहना है गाँव में कुछ लोगों से जमीन जायजाद को लेकर कुछ रंजिश थी उन्होने विष्णु को सबक सिखाने के लिए किसी लड़की को पैसे देकर रेप का इल्ज़ाम लगवा दिया ।


आगरा जेल के अधिकारी कहते है कि विष्णु बहुत शरीफ इंसान है ऐसा नहीं लगता कि उसने कभी रेप जैसा घिनौना काम किया हो और जब तक विष्णु जेल में रहा उसका आचरण बहुत अच्छा रहा विष्णु लगातार काम करता रहा जिससे उसे पारश्रमिक भी मिलता रहा ।

कानून सबके लिए बराबर है लेकिन .......

आज देश में रेप की घटनाओं में इजाफ़ा हुआ है जिन घटनाओं को मीडिया समाज आदि का संरक्षण प्राप्त हो जाता है उसके लिए सभी आवाज़ उठाते है और रेप के आरोपी को सज़ा दिलवाने के लिए भरसक कोशिश भी करते है लेकिन जहां कानून रेप के दोषी को सुसंगत धाराओं में सज़ा देता है वही दूसरी तरफ रेप के आरोपी को भी दोष साबित होने से पहले ही समाज की नजर में दोषी मान लिया जाता है जिसका असर हमारी कानून व्यवस्था पर तो पड़ता ही है लेकिन इससे कहीं  ज्यादा उस व्यक्ति पर पड़ता है जिसने रेप किया ही नहीं अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आरोपी का दोष सिद्ध हो या न हो उसका जीवन बरबादी के कगार पर पहुँच ही जाता है ,जहां हमारा कानून दोषियों को सज़ा देने के लिए जिन गवाहों और सबूतो के मद्देनजर मानक रखता है वही गवाह और सबूत कभी कभी निजी स्वार्थ वश बदल भी जाते है हमारे देश में ऐसे कई केस आज भी लंबित है जिनका फैसला कई दशकों से नहीं हो पाया है ।

विष्णु के गुजरे  बीस साल का दोषी कौन ?

विष्णु तिवारी के मामले में पैसे देकर कैसे रेप की सजा दिलवाई जा सकती है और कैसे किसी का भी जीवन बर्बाद किया जा सकता है इससे अच्छा उदाहरण कोई और नहीं मिल सकता अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि इस पूरे प्रकरण में विष्णु तिवारी के वो 20 वर्ष जो एक झूठे आरोप के तले खत्म हो गए वापस कौन करेगा ? क्या वो लोग जो जमीन जायजाद कि रंजिश रखते थे या फिर वो लड़की जिसने कुछ पैसे के लिये रेप का इल्ज़ाम विष्णु पर लगा दिया या फिर पुलिस जिसने तहक़ीक़ात की या फिर हमारा न्यायालय जहां 20 वर्ष के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि विष्णु निर्दोष है ? सोचिए और मनन कीजिये ।







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