आखिर कबतकः अब उत्तराखण्ड के इस कॉल सेंटर में बंधक बनाए गए असम की एक युवती और दो युवक! भाग कर पहुंचे पुलिस के पास, पीड़ितों की आपबीती सुन पुलिस हैरान

देहरादून। उत्तराखण्ड में अंकिता हत्याकाण्ड का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि एक और ऐसा ही मामला सामने आया है। ऋषिकेश मंे लक्ष्मणझूला के अंतर्गत कुनाऊ गांव में संचालित एक कॉल सेंटर संचालक पर एक युवती और दो युवकों को बंधक बनाने का आरोप लगा है। हांलाकि आज बुधवार की सुबह युवक और युवती वहां से भाग निकले और पुलिस को अपनी आपबीती बताई। मामला सामने आने के बाद कॉल सेंटर संचालक फरार बताए जा रहे हैं। 
पुलिस कॉल सेंटर से भागे युवती और युवकों से पुलिस पूछताछ कर रही है। उन्होंने बताया कि कॉल सेंटर को गौरव नाम का व्यक्ति संचालित करता था जो आवास विकास कॉलोनी ऋषिकेश में रहता है। मूल रूप से वह आगरा का रहने वाला है। उसके साथ में तीन सहयोगी वसीम, गुलाम और मुस्कान रहते थे। जब से वह यहां काम करने आए हैं तब से उन्हें यहां से बाहर नहीं जाने दिया जाता था। असम निवासी पीड़ित 28 साल के अरूप कुमार के मुताबिक तीन सप्ताह पहले उन्हें नौकरी का ऑफर देकर कुनाऊं गांव में बुलाया गया था। उसके साथ में असम की ही निवासी लिंडा और रिचर्ड थे। आरोप है कि आरोपित उन्हें प्रताड़ित कर उनपर धोखाधड़ी के लिए लगातार दबाव बना रहे थे। पीड़ितों के अनुसार संचालकों ने उनपर अंतरराष्ट्रीय कॉल कर लोगों से ठगी करने का दबाव डाला, जिससे उन्होंने साफ इंकार कर दिया। अरूप ने बताया कि इससे नाराज होकर संचालकों ने उन्हें गांव में ही एक घर में कैद कर लिया। 
बताया तो यहां तक जा रहा है कि जब यह तीनों भागे तो संचालकों ने उनका पीछा किया और बैराज पर उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद उनके बीच खींचतान हुई और संचालक ने अरूप का मोबाइल गंगा में फेंक दिया। घटनास्थल थाना लक्ष्मण झूला पौड़ी गढ़वाल से जुड़ा होने के कारण कोतवाली ऋषिकेश पुलिस ने मामला उन्हें सौंप दिया है। ऋषिकेश के कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रवि कुमार सैनी ने बताया कि पुलिस कंट्रोल रूम पर किसी व्यक्ति की ओर से सूचना दी गई थी। जिसके बाद ऋषिकेश पुलिस ने इस दिशा में सतर्कता बरतते हुए आवश्यक कदम उठाया। लक्ष्मण झूला थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद गुसाईं ने बताया कि स्थानीय पुलिस अब इस मामले में अपने स्तर पर जांच में जुट गई है।