धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2022-अब अगर धर्म परिवर्तन किया तो जिंदगीभर नही मिलेगा आरक्षण,धर्म छिपाकर शादी करने पर मिलेगी सजा!

आए दिन धर्म परिवर्तन के मामले सामने आते रहते हैं। धर्म परिवर्तन के इन मामलों में जबरन धर्मांतरण से लेकर धोखाधड़ी के साथ धर्मांतरण और धर्मांतरण के उद्देश्य से विवाह जैसे मामले आम हो गए हैं। पूरे देश में जिस तरह से धर्मपरिवर्तन का कुचक्र चलाया जा रहा है, इससे हर कोई चिंतित है। इस पर लगाम लगाने को लेकर विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा अपने-अपने हिसाब से कड़े कानून बनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार ने राज्य में धर्मांतरण के मौजूदा कानून में बदलाव करने के उद्देश्य से ‘हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 पेश किया है।
अब अगर अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको किसी तरह  का आरक्षण नहीं मिलेगा।हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए ‘धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022’ में पिछले कानून की तुलना में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। जयराम ठाकुर सरकार द्वारा पेश नए संशोधन विधेयक में बलपूर्वक धर्मांतरण के लिए जेल की सजा को 7 साल से बढ़ाकर अधिकतम 10 साल तक करने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, विधेयक में प्रस्तावित प्रावधान के मुताबिक धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत की गई सभी शिकायतों की जाँच उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) से निचले दर्जे का कोई पुलिस अधिकारी नहीं कर सकेगा। यही नहीं, इस मामले की पूरी सुनवाई सेशन कोर्ट में होगी।

जयराम ठाकुर सरकार द्वारा पेश किए गए इस संशोधन विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह करने के लिए अपने धर्म को छिपाता है तो दोषी व्यक्ति को कम से कम 3 साल की सजा हो सकती है। साथ ही इस सजा को दस साल तक बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, विधेयक में, न्यूनतम जुर्माना ₹50000 (पचास हजार रुपयए) किया गया है, जिसे ₹100000 (एक लाख रुपए) तक बढ़ाया जा सकता है।यही नहीं, इस विधेयक में धर्म पविर्तन करने से एक माह पूर्व जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ पत्र प्रस्तुत करने का भी प्रावधान किया गया है। इस शपथ पत्र में यह बताना होगा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। हालाँकि, यदि कोई अपने मूल धर्म में वापस आना चाहता है तो उसे किसी प्रकार का शपथ पत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने विधेयक पेश करते हुए कहा, “अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सजा की धाराओं में कुछ मामूली बदलाव किए जा रहे हैं। अधिनियम गलत बयानी, बल, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन, शादी या किसी भी कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है। धर्म परिवर्तन के एकमात्र उद्देश्य के लिए किसी भी विवाह को अधिनियम की धारा 5 के तहत “शून्य और शून्य (मतलब अवैध)” घोषित किया जाता है।
हिमाचल प्रदेश के अलावा हाल ही में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में भी धर्मांतरण पर कड़े कानून बनाए गए हैं।