उत्तराखंड/कुमाऊं:वाह रे सिस्टम!छेड़छाड़,अभद्रता,गंदी गालियां,धमकी,ये सब सहन करने के बाद न्याय के तौर पर पीड़ित महिला शिक्षिका के दुर्गम जगह के लिए दे दिए ट्रांसफर के आदेश!ये न्याय या अन्याय?सारा विभाग कटघरे में!महिलाओं की सुरक्षा के सारे वादे खोखले

उत्तराखंड/रानीखेत:5/10/2022

उत्तराखंड में अंकिता हत्याकांड की आग पूरे राज्यभर में फैली हुई है इस हत्याकांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगें है। अंकिता हत्याकांड के बाद उत्तराखंड सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिर बड़े बड़े वादे कर रही है। तमाम संगठन भी अंकिता को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन कर रहे है। लेकिन ज़मीनी हकीकत ये है कि आज जब कोई महिला शोषण का शिकार होती है तब मदद करने न तो सरकार आती है न ही ये संगठन। उल्टा पीड़िता को ही दोषी मान लिया जाता है। 
ऐसा ही हो रहा है नैनीताल निवासी मृणाल नेगी के साथ,जो रानीखेत के भुजान में उत्कृष्ट राजकीय विद्यालय में इंग्लिश की प्रवक्ता है। पिछले कई महीनों से मृणाल को उनके ही विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता मिथिलेश्वर सिंह छेड़छाड़, शोषण,अभद्रता, और गंदी गाली गलौज कर परेशान कर रहे है। मृणाल का कहना है कि मिथिलेश्वर सिंह उनके बॉडी पार्ट्स पर भी भद्दे कमेंट्स करते है इसका विरोध करने पर उन्होनें मृणाल के खिलाफ जाल बिछाना शुरू कर दिया,और विद्यालय की एक महिला और प्रिंसिपल का झगड़ा जब हुआ तब मृणाल के ऊपर भी एसटी एक्ट में मुकदमा दायर करवा दिया।
मृणाल ने मामले की शिकायत पुलिस से की पहले मामला राजस्व पुलिस के पास था जब आवाज़ इंडिया न्यूज की दखल हुई तब मामला रेगुलर पुलिस को ट्रांसफर किया गया। 

मृणाल ने बताया कि 2 अक्टूबर को जब गांधी जयंती पर विद्यालय में प्रभात फेरी निकलनी चाहिए थी तब एक विद्यार्थी भी विद्यालय नही पहुंचा ठीक उसी दिन गांव के कुछ लड़के मृणाल के खिलाफ नारेबाजी करते है गेट पर तालाबंदी करते है और मृणाल को विद्यालय से निकलने नही देते ये सब एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया जिसकी जांच अब तक नही हुई।

 


मामले में अब मुख्य शिक्षा अधिकारी  खण्ड शिक्षा अधिकारी को दोषियो के साथ साथ पीड़िता के भी दुर्गम क्षेत्र में ट्रांसफर करने के आदेश दे दिए है। इस आदेश से मृणाल खुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रही है।उनका कहना है कि अगर कोई महिला छेड़छाड़ अभद्रता गाली गलौज बर्दाश्त करती रहे तो ठीक है,अगर महिला विरोध करे तो उसका ट्रांसफर दुर्गम क्षेत्र में कर दिया जाएगा ये न्याय नही अन्याय है