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उत्तराखण्डः हरिद्वार में ‘सदाराम’ बनकर रह रहा था सुरेंद्र कोली! मुस्तफाबाद से रोशनाबाद और फिर भूपतवाला पहुंचा, आधार कार्ड ने खोला बड़ा राज

Author:Awaaz Desk
🕒 Last Updated:2026-09-18 17:04:47
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नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से देशभर में चर्चाओं में आए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में खुदकुशी कर ली। उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में लालमाता मंदिर के सामने एक चाय के खोखे में उसका शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया।
उत्तराखण्डः हरिद्वार में ‘सदाराम’ बनकर रह रहा था सुरेंद्र कोली! मुस्तफाबाद से रोशनाबाद और फिर भूपतवाला पहुंचा, आधार कार्ड ने खोला बड़ा राज

उत्तराखण्डः हरिद्वार में ‘सदाराम’ बनकर रह रहा था सुरेंद्र कोली! मुस्तफाबाद से रोशनाबाद और फिर भूपतवाला पहुंचा, आधार कार्ड ने खोला बड़ा राज (सांकेतिक तस्वीर)

⚡ख़बरें फटाफट (संक्षेप में)

⏱️ 30-Sec Glance
  • नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से देशभर में चर्चाओं में आए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में खुदकुशी कर ली।
  • उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में लालमाता मंदिर के सामने एक चाय के खोखे में उसका शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया।
  • चौंकाने वाली बात यह है कि सुरेंद्र कोली पिछले करीब तीन महीने से हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर ‘सदाराम’ के नाम से रह रहा था।
  • आसपास के लोगों और खोखा मालिक तक को उसकी वास्तविक पहचान की जानकारी नहीं थी।

हरिद्वार। नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से देशभर में चर्चाओं में आए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में खुदकुशी कर ली। उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में लालमाता मंदिर के सामने एक चाय के खोखे में उसका शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। चौंकाने वाली बात यह है कि सुरेंद्र कोली पिछले करीब तीन महीने से हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर ‘सदाराम’ के नाम से रह रहा था। आसपास के लोगों और खोखा मालिक तक को उसकी वास्तविक पहचान की जानकारी नहीं थी। उसकी पहचान जेब से मिले आधार कार्ड के जरिए हुई। जानकारी के अनुसार सुरेंद्र कोली करीब तीन महीने पहले हरिद्वार पहुंचा था। शुरुआत में वह मुस्तफाबाद गांव में रहा और बाद में रोशनाबाद क्षेत्र में रहने लगा। इसी दौरान उसकी पहचान धर्मेंद्र नाम के व्यक्ति से हुई। बताया जा रहा है कि सुरेंद्र ने धर्मेंद्र को भी अपनी वास्तविक पहचान नहीं बताई थी। उसने अपना नाम सदाराम बताया और इसी नाम से हरिद्वार में रह रहा था। करीब चार दिन पहले सुरेंद्र ने अनिल शर्मा नाम के व्यक्ति से चाय का खोखा किराए पर लिया था। इसके बाद उसने लालमाता मंदिर के सामने इसी खोखे में चाय की दुकान शुरू कर दी। वह सामान्य तरीके से लोगों के बीच रह रहा था। आसपास के लोगों को भी उसके अतीत के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आज जब सुरेंद्र कोली का शव उसी चाय के खोखे के भीतर मिला तो आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शव की पहचान के दौरान पुलिस ने मृतक की जेब की तलाशी ली। इस दौरान आधार कार्ड मिलने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई। आधार कार्ड में मृतक का नाम सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर राम कोली और पता डी-5, सेक्टर-31, नोएडा, गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश दर्ज था। इसके बाद पुलिस को पता चला कि मृतक वही सुरेंद्र कोली है, जिसका नाम करीब दो दशक पहले देश को झकझोर देने वाले निठारी कांड से जुड़ा था। सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र का रहने वाला था। कई साल पहले वह रोजगार की तलाश में नोएडा गया था, जहां वह निठारी स्थित डी-5 मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। बाद में इसी मकान से जुड़े मामले में उसका नाम सामने आया और वह देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया।

दो आधार कार्ड मिलने से और गहराया पहचान छिपाने का मामला
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सुरेंद्र कोली की जेब से दो आधार कार्ड मिले थे। एक आधार कार्ड में उसका नाम ‘सदाराम पुत्र शंकर’ दर्ज बताया जा रहा है, जबकि दूसरे में ‘सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर कोली’ लिखा था। इससे पुलिस को आशंका है कि वह हरिद्वार में अपनी वास्तविक पहचान सामने नहीं आने देना चाहता था। पिछले करीब तीन महीने से अलग-अलग स्थानों पर रहने के दौरान उसने अपनी पहचान छिपाए रखी। मुस्तफाबाद से रोशनाबाद और फिर भूपतवाला तक वह अलग-अलग नाम से रहा। यहां तक कि जिस खोखे को उसने चाय की दुकान के लिए किराए पर लिया, उसके मालिक और आसपास के लोगों को भी उसके निठारी कांड से जुड़े अतीत की जानकारी नहीं थी। पुलिस की शुरुआती जांच में आर्थिक परेशानी की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सुरेंद्र कोली करीब 15 दिन पहले हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था, लेकिन बाद में उसने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उसने चाय की दुकान चलाने का फैसला किया और चार दिन पहले खोखा किराए पर लिया। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक वह आर्थिक तंगी से भी परेशान था। इसके अलावा पारिवारिक विवाद की बात भी कही जा रही है। धर्मेंद्र के अनुसार परिवार में एक बच्चे के जन्मदिन को लेकर विवाद चल रहा था। हालांकि इन परिस्थितियों और उसकी मौत के बीच सीधा संबंध अभी पुलिस जांच में स्थापित नहीं हुआ है।

परिवार से जुड़े विवाद की भी जांच
पुलिस के सामने यह जानकारी भी आई है कि सुरेंद्र के परिवार में एक बच्चे के जन्मदिन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी वजह से उसके तनाव में होने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस अभी आत्महत्या के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों के दौरान सुरेंद्र किन-किन लोगों के संपर्क में था। उसकी आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियों और हरिद्वार में रहने के दौरान उसकी गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

हरिद्वार में क्यों छिपाकर रखी पहचान, पुलिस तलाश रही जवाब
अब हरिद्वार में उसकी मौत के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर वह अपनी पहचान छिपाकर ‘सदाराम’ के नाम से क्यों रह रहा था। उसने दो आधार कार्ड क्यों रखे थे और हरिद्वार पहुंचने के बाद उसने अपने अतीत को लोगों से क्यों छिपाए रखा। पुलिस इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बना रही है। फिलहाल मौके से मिले तथ्यों, बरामद दस्तावेजों और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि सुरेंद्र कोली के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। मौके से मिले तथ्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस सभी पहलुओं की जानकारी जुटा रही है।

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