देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में तहलका मचाने वाले हाई-प्रोफाइल ‘कंपनी धोखाधड़ी और उत्पीड़न मामले’ में एक नया और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू और उनके भतीजे सतेंद्र राठौर को विशेष जांच दल (SIT) ने अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार कर लिया है। झांसी से पकड़े गए मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू ने अपनी गिरफ्तारी के बाद बयान दिया-"मेरे जेल जाने से अगर मेरी पत्नी खुश है तो यही सही।" उनका यह बयान जहां एक पारिवारिक और कानूनी जंग की गहराई को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी देता है कि कानून की नजर में सत्ता और रसूख का कोई मोल नहीं है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा विवाद अब गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के नए मोड़ पर पहुंच गया है। चार कंपनियों के निदेशक पद से रेखा आर्या को कथित फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर हटाने के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू और उनके भतीजे सतेंद्र राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद गिरधारी लाल साहू के बयान ने इस प्रकरण को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने कहा, "मेरे जेल जाने से अगर मेरी पत्नी खुश है तो यही सही।" उनका यह बयान सामने आने के बाद पारिवारिक विवाद और कानूनी कार्रवाई दोनों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। देहरादून के एसएसपी के निर्देश पर गठित नौ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने छह नवंबर को दोनों आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया। पुलिस ने मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू को उत्तर प्रदेश के झांसी से और उनके भतीजे सतेंद्र राठौर को बरेली के जोगी नवादा क्षेत्र से पकड़ा। दोनों लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहे थे। उनकी तलाश में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही थीं। आखिरकार इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को सफलता मिली। पुलिस के अनुसार, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर को देहरादून की कैंट कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने पति गिरधारी लाल साहू पर पूर्व विवाह की जानकारी छिपाकर शादी करने, गाली-गलौज, मारपीट और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित करने जैसे आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उन्हें चार कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी ने एसपी ग्रामीण प्रथम के पर्यवेक्षण में नौ सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। एसआईटी की जांच में सामने आया कि गिरधारी लाल साहू ने कथित तौर पर अपने भतीजे सतेंद्र राठौर के साथ मिलकर रेखा आर्या के फर्जी हस्ताक्षर किए और दस्तावेजों में कूटरचना कर उन्हें चार कंपनियों के निदेशक पद से हटवा दिया। इसके बाद सतेंद्र राठौर को इन कंपनियों में निदेशक बनाए जाने की बात सामने आई। इन कंपनियों में देवों के देव महादेव, बनखंडी रुद्राक्ष धाम, श्री अंबे ऑटो डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री बनखंडी धाम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। जांच के दौरान एसआईटी ने कथित ऑडियो क्लिप कब्जे में लेने के साथ गवाहों के बयान दर्ज किए और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की। इसके बाद सतेंद्र राठौर की भूमिका सामने आने पर उसे भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया। पुलिस के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और गैंगस्टर अधिनियम समेत 44 प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी मिली है। हालांकि, इन मामलों की वर्तमान कानूनी स्थिति अलग-अलग है और प्रत्येक मामले में आरोपों का निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी उनसे पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी का अगला फोकस कथित फर्जी हस्ताक्षरों, कंपनी के अभिलेखों, दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और दोनों आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट करना है। इस पूरे प्रकरण में अब कई सवालों के जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल गिरफ्तारी के बाद गिरधारी लाल साहू का बयान भी चर्चा में है, लेकिन मामले की असली तस्वीर एसआईटी की पूछताछ, दस्तावेजी साक्ष्यों और अदालत में होने वाली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।






